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Farooq Khan and Ahmed

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110 An-Naşr ٱلنَّصْر

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

110:1 إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ
110:1 जब अल्लाह की सहायता आ जाए और विजय प्राप्त हो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

110:2 وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًا
110:2 और तुम लोगों को देखो कि वे अल्लाह के दीन (धर्म) में गिरोह के गिरोह प्रवेश कर रहे है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

110:3 فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا
110:3 तो अपने रब की प्रशंसा करो और उससे क्षमा चाहो। निस्संदेह वह बड़ा तौबा क़बूल करनेवाला है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)