Selected

Original Text
Suhel Khan and Saifur Nadwi

Available Translations

110 An-Naşr ٱلنَّصْر

< Previous   3 Āyah   The Divine Support      Next >  

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

110:1 إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ
110:1 ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

110:2 وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًا
110:2 और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

110:3 فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا
110:3 तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)