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Farooq Khan and Ahmed

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97 Al-Qadr ٱلْقَدْر

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

97:1 إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ
97:1 हमने इसे क़द्र की रात में अवतरित किया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

97:2 وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ
97:2 और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

97:3 لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ
97:3 क़द्र की रात उत्तम है हज़ार महीनों से, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

97:4 تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ
97:4 उसमें फ़रिश्तें और रूह हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

97:5 سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ
97:5 वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)