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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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95 At-Tīn ٱلتِّين

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

95:1 وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ
95:1 इन्जीर और ज़ैतून की क़सम - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:2 وَطُورِ سِينِينَ
95:2 और तूर सीनीन की - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:3 وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ
95:3 और उस अमन वाले शहर (मक्का) की - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:4 لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍ
95:4 कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:5 ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ
95:5 फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:6 إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
95:6 मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:7 فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ
95:7 तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

95:8 أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ
95:8 क्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है) - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)