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Farooq Khan and Ahmed

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114 An-Nās ٱلنَّاس

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

114:1 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
114:1 कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

114:2 مَلِكِ ٱلنَّاسِ
114:2 मनुष्यों के सम्राट की - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

114:3 إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ
114:3 मनुष्यों के उपास्य की - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

114:4 مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ
114:4 वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

114:5 ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ
114:5 जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

114:6 مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
114:6 जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)