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Farooq Khan and Ahmed

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94 Ash-Sharĥ or Al-Inshirah ٱلشَّرْح

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

94:1 أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ
94:1 क्या ऐसा नहीं कि हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल दिया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:2 وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ
94:2 और तुमपर से तुम्हारा बोझ उतार दिया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:3 ٱلَّذِىٓ أَنقَضَ ظَهْرَكَ
94:3 जो तुम्हारी कमर तोड़े डाल रहा था? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:4 وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ
94:4 और तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को ऊँचा कर दिया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:5 فَإِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا
94:5 अतः निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:6 إِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا
94:6 निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:7 فَإِذَا فَرَغْتَ فَٱنصَبْ
94:7 अतः जब निवृत हो तो परिश्रम में लग जाओ, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

94:8 وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَٱرْغَب
94:8 और अपने रब से लौ लगाओ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)