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Farooq Khan and Ahmed

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105 Al-Fīl ٱلْفِيل

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

105:1 أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَـٰبِ ٱلْفِيلِ
105:1 क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने हाथीवालों के साथ कैसा बरताव किया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

105:2 أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِى تَضْلِيلٍ
105:2 क्या उसने उनकी चाल को अकारथ नहीं कर दिया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

105:3 وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ
105:3 और उनपर नियुक्त होने को झुंड के झुंड पक्षी भेजे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

105:4 تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍ مِّن سِجِّيلٍ
105:4 उनपर कंकरीले पत्थर मार रहे थे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

105:5 فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍ مَّأْكُولٍۭ
105:5 अन्ततः उन्हें ऐसा कर दिया, जैसे खाने का भूसा हो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)