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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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105 Al-Fīl ٱلْفِيل

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

105:1 أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَـٰبِ ٱلْفِيلِ
105:1 ऐ रसूल क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे परवरदिगार ने हाथी वालों के साथ क्या किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

105:2 أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِى تَضْلِيلٍ
105:2 क्या उसने उनकी तमाम तद्बीरें ग़लत नहीं कर दीं (ज़रूर) - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

105:3 وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ
105:3 और उन पर झुन्ड की झुन्ड चिड़ियाँ भेज दीं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

105:4 تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍ مِّن سِجِّيلٍ
105:4 जो उन पर खरन्जों की कंकरियाँ फेकती थीं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

105:5 فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍ مَّأْكُولٍۭ
105:5 तो उन्हें चबाए हुए भूस की (तबाह) कर दिया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)