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Farooq Khan and Ahmed

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26 Ash-Shu`arā' ٱلشُّعَرَاء

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

26:1 طسٓمٓ
26:1 ता॰ सीन॰ मीम॰ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:2 تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ
26:2 ये स्पष्ट किताब की आयतें है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:3 لَعَلَّكَ بَـٰخِعٌ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ
26:3 शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:4 إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ءَايَةً فَظَلَّتْ أَعْنَـٰقُهُمْ لَهَا خَـٰضِعِينَ
26:4 यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:5 وَمَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّنَ ٱلرَّحْمَـٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا۟ عَنْهُ مُعْرِضِينَ
26:5 उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:6 فَقَدْ كَذَّبُوا۟ فَسَيَأْتِيهِمْ أَنۢبَـٰٓؤُا۟ مَا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ
26:6 अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:7 أَوَلَمْ يَرَوْا۟ إِلَى ٱلْأَرْضِ كَمْ أَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
26:7 क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:8 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:8 निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:9 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:9 और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:10 وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱئْتِ ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
26:10 और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:11 قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ
26:11 फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:12 قَالَ رَبِّ إِنِّىٓ أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ
26:12 उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:13 وَيَضِيقُ صَدْرِى وَلَا يَنطَلِقُ لِسَانِى فَأَرْسِلْ إِلَىٰ هَـٰرُونَ
26:13 और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:14 وَلَهُمْ عَلَىَّ ذَنۢبٌ فَأَخَافُ أَن يَقْتُلُونِ
26:14 और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:15 قَالَ كَلَّا ۖ فَٱذْهَبَا بِـَٔايَـٰتِنَآ ۖ إِنَّا مَعَكُم مُّسْتَمِعُونَ
26:15 कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:16 فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَآ إِنَّا رَسُولُ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:16 अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:17 أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ
26:17 कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:18 قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ
26:18 (फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:19 وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ ٱلَّتِى فَعَلْتَ وَأَنتَ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ
26:19 और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:20 قَالَ فَعَلْتُهَآ إِذًا وَأَنَا۠ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ
26:20 कहा, ऐसा तो मुझसे उस समय हुआ जबकि मैं चूक गया था - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:21 فَفَرَرْتُ مِنكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ لِى رَبِّى حُكْمًا وَجَعَلَنِى مِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ
26:21 फिर जब मुझे तुम्हारा भय हुआ तो मैं तुम्हारे यहाँ से भाग गया। फिर मेरे रब ने मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान की और मुझे रसूलों में सम्मिलित किया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:22 وَتِلْكَ نِعْمَةٌ تَمُنُّهَا عَلَىَّ أَنْ عَبَّدتَّ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ
26:22 यही वह उदार अनुग्रह है जिसका रहमान तू मुझपर जताता है कि तूने इसराईल की सन्तान को ग़ुलाम बना रखा है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:23 قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:23 फ़िरऔन ने कहा, "और यह सारे संसार का रब क्या होता है?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:24 قَالَ رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
26:24 उसने कहा, "आकाशों और धरती का रब और जो कुछ इन दोनों का मध्य है उसका भी, यदि तुम्हें यकीन हो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:25 قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُۥٓ أَلَا تَسْتَمِعُونَ
26:25 उसने अपने आस-पासवालों से कहा, "क्या तुम सुनते नहीं हो?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:26 قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ
26:26 कहा, "तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादा का रब।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:27 قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ ٱلَّذِىٓ أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ
26:27 बोला, "निश्चय ही तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, बिलकुल ही पागल है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:28 قَالَ رَبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ
26:28 उसने कहा, "पूर्व और पश्चिम का रब और जो कुछ उनके बीच है उसका भी, यदि तुम कुछ बुद्धि रखते हो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:29 قَالَ لَئِنِ ٱتَّخَذْتَ إِلَـٰهًا غَيْرِى لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ ٱلْمَسْجُونِينَ
26:29 बोला, "यदि तूने मेरे सिवा किसी और को पूज्य एवं प्रभु बनाया, तो मैं तुझे बन्दी बनाकर रहूँगा।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:30 قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَىْءٍ مُّبِينٍ
26:30 उसने कहा, "क्या यदि मैं तेरे पास एक स्पष्ट चीज़ ले आऊँ तब भी?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:31 قَالَ فَأْتِ بِهِۦٓ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
26:31 बोलाः “अच्छा वह ले आ; यदि तू सच्चा है” । - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:32 فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِىَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
26:32 फिर उसने अपनी लाठी डाल दी, तो अचानक क्या देखते है कि वह एक प्रत्यक्ष अज़गर है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:33 وَنَزَعَ يَدَهُۥ فَإِذَا هِىَ بَيْضَآءُ لِلنَّـٰظِرِينَ
26:33 और उसने अपना हाथ बाहर खींचा तो फिर क्या देखते है कि वह देखनेवालों के सामने चमक रहा है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:34 قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُۥٓ إِنَّ هَـٰذَا لَسَـٰحِرٌ عَلِيمٌ
26:34 उसने अपने आस-पास के सरदारों से कहा, "निश्चय ही यह एक बड़ा ही प्रवीण जादूगर है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:35 يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِۦ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ
26:35 चाहता है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारी अपनी भूमि से निकाल बाहर करें; तो अब तुम क्या कहते हो?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:36 قَالُوٓا۟ أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَٱبْعَثْ فِى ٱلْمَدَآئِنِ حَـٰشِرِينَ
26:36 उन्होंने कहा, "इसे और इसके भाई को अभी टाले रखिए, और एकत्र करनेवालों को नगरों में भेज दीजिए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:37 يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَلِيمٍ
26:37 कि वे प्रत्येक प्रवीण जादूगर को आपके पास ले आएँ।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:38 فَجُمِعَ ٱلسَّحَرَةُ لِمِيقَـٰتِ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ
26:38 अतएव एक निश्चित दिन के नियत समय पर जादूगर एकत्र कर लिए गए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:39 وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ
26:39 और लोगों से कहा गया, "क्या तुम भी एकत्र होते हो?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:40 لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ ٱلسَّحَرَةَ إِن كَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَـٰلِبِينَ
26:40 कदाचित हम जादूगरों ही के अनुयायी रह जाएँ, यदि वे विजयी हुए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:41 فَلَمَّا جَآءَ ٱلسَّحَرَةُ قَالُوا۟ لِفِرْعَوْنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِن كُنَّا نَحْنُ ٱلْغَـٰلِبِينَ
26:41 फिर जब जादूगर आए तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा, "क्या हमारे लिए कोई प्रतिदान भी है, यदि हम प्रभावी रहे?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:42 قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ إِذًا لَّمِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ
26:42 उसने कहा, "हाँ, और निश्चित ही तुम तो उस समय निकटतम लोगों में से हो जाओगे।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:43 قَالَ لَهُم مُّوسَىٰٓ أَلْقُوا۟ مَآ أَنتُم مُّلْقُونَ
26:43 मूसा ने उनसे कहा, "डालो, जो कुछ तुम्हें डालना है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:44 فَأَلْقَوْا۟ حِبَالَهُمْ وَعِصِيَّهُمْ وَقَالُوا۟ بِعِزَّةِ فِرْعَوْنَ إِنَّا لَنَحْنُ ٱلْغَـٰلِبُونَ
26:44 तब उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ डाल दी और बोले, "फ़िरऔन के प्रताप से हम ही विजयी रहेंगे।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:45 فَأَلْقَىٰ مُوسَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِىَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ
26:45 फिर मूसा ने अपनी लाठी फेकी तो क्या देखते है कि वह उसे स्वाँग को, जो वे रचाते है, निगलती जा रही है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:46 فَأُلْقِىَ ٱلسَّحَرَةُ سَـٰجِدِينَ
26:46 इसपर जादूगर सजदे में गिर पड़े - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:47 قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:47 वे बोल उठे, "हम सारे संसार के रब पर ईमान ले आए - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:48 رَبِّ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ
26:48 मूसा और हारून के रब पर!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:49 قَالَ ءَامَنتُمْ لَهُۥ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُۥ لَكَبِيرُكُمُ ٱلَّذِى عَلَّمَكُمُ ٱلسِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَـٰفٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ
26:49 उसने कहा, "तुमने उसको मान लिया, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति देता। निश्चय ही वह तुम सबका प्रमुख है, जिसने तुमको जादू सिखाया है। अच्छा, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हुआ जाता है! मैं तुम्हारे हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और तुम सभी को सूली पर चढ़ा दूँगा।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:50 قَالُوا۟ لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
26:50 उन्होंने कहा, "कुछ हरज नहीं; हम तो अपने रब ही की ओर पलटकर जानेवाले है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:51 إِنَّا نَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَـٰيَـٰنَآ أَن كُنَّآ أَوَّلَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
26:51 हमें तो इसी की लालसा है कि हमारा रब हमारी ख़ताओं को क्षमा कर दें, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाए।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:52 ۞ وَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِىٓ إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
26:52 हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "मेरे बन्दों को लेकर रातों-रात निकल जा। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:53 فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِى ٱلْمَدَآئِنِ حَـٰشِرِينَ
26:53 इसपर फ़िरऔन ने एकत्र करनेवालों को नगर में भेजा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:54 إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ
26:54 कि "यह गिरे-पड़े थोड़े लोगों का एक गिरोह है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:55 وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَآئِظُونَ
26:55 और ये हमें क्रुद्ध कर रहे है। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:56 وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَـٰذِرُونَ
26:56 और हम चौकन्ना रहनेवाले लोग है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:57 فَأَخْرَجْنَـٰهُم مِّن جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
26:57 इस प्रकार हम उन्हें बाग़ों और स्रोतों - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:58 وَكُنُوزٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
26:58 और ख़जानों और अच्छे स्थान से निकाल लाए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:59 كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَـٰهَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ
26:59 ऐसा ही हम करते है और इनका वारिस हमने इसराईल की सन्तान को बना दिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:60 فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ
26:60 सुबह-तड़के उन्होंने उनका पीछा किया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:61 فَلَمَّا تَرَٰٓءَا ٱلْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَـٰبُ مُوسَىٰٓ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ
26:61 फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया तो मूसा के साथियों ने कहा, "हम तो पकड़े गए!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:62 قَالَ كَلَّآ ۖ إِنَّ مَعِىَ رَبِّى سَيَهْدِينِ
26:62 उसने कहा, "कदापि नहीं, मेरे साथ मेरा रब है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:63 فَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضْرِب بِّعَصَاكَ ٱلْبَحْرَ ۖ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَٱلطَّوْدِ ٱلْعَظِيمِ
26:63 तब हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "अपनी लाठी सागर पर मार।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:64 وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ ٱلْـَٔاخَرِينَ
26:64 और हम दूसरों को भी निकट ले आए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:65 وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓ أَجْمَعِينَ
26:65 हमने मूसा को और उन सबको जो उसके साथ थे, बचा लिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:66 ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ
26:66 और दूसरों को डूबो दिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:67 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:67 निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:68 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:68 और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:69 وَٱتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَٰهِيمَ
26:69 और उन्हें इबराहीम का वृत्तान्त सुनाओ, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:70 إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَا تَعْبُدُونَ
26:70 जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौंम के लोगों से कहा, "तुम क्या पूजते हो?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:71 قَالُوا۟ نَعْبُدُ أَصْنَامًا فَنَظَلُّ لَهَا عَـٰكِفِينَ
26:71 उन्होंने कहा, "हम बुतों की पूजा करते है, हम तो उन्हीं की सेवा में लगे रहेंगे।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:72 قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ إِذْ تَدْعُونَ
26:72 उसने कहा, "क्या ये तुम्हारी सुनते है, जब तुम पुकारते हो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:73 أَوْ يَنفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ
26:73 या ये तुम्हें कुछ लाभ या हानि पहुँचाते है?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:74 قَالُوا۟ بَلْ وَجَدْنَآ ءَابَآءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ
26:74 उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हमने तो अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते पाया है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:75 قَالَ أَفَرَءَيْتُم مَّا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ
26:75 उसने कहा, "क्या तुमने उनपर विचार भी किया कि जिन्हें तुम पूजते हो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:76 أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُمُ ٱلْأَقْدَمُونَ
26:76 तुम और तुम्हारे पहले के बाप-दादा? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:77 فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّ لِّىٓ إِلَّا رَبَّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:77 वे सब तो मेरे शत्रु है, सिवाय सारे संसार के रब के, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:78 ٱلَّذِى خَلَقَنِى فَهُوَ يَهْدِينِ
26:78 जिसने मुझे पैदा किया और फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:79 وَٱلَّذِى هُوَ يُطْعِمُنِى وَيَسْقِينِ
26:79 और वही है जो मुझे खिलाता और पिलाता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:80 وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ
26:80 और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:81 وَٱلَّذِى يُمِيتُنِى ثُمَّ يُحْيِينِ
26:81 और वही है जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:82 وَٱلَّذِىٓ أَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لِى خَطِيٓـَٔتِى يَوْمَ ٱلدِّينِ
26:82 और वही है जिससे मुझे इसकी आकांक्षा है कि बदला दिए जाने के दिन वह मेरी ख़ता माफ़ कर देगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:83 رَبِّ هَبْ لِى حُكْمًا وَأَلْحِقْنِى بِٱلصَّـٰلِحِينَ
26:83 ऐ मेरे रब! मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान कर और मुझे योग्य लोगों के साथ मिला। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:84 وَٱجْعَل لِّى لِسَانَ صِدْقٍ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ
26:84 और बाद के आनेवालों में से मुझे सच्ची ख़्याति प्रदान कर - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:85 وَٱجْعَلْنِى مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ ٱلنَّعِيمِ
26:85 और मुझे नेमत भरी जन्नत के वारिसों में सम्मिलित कर - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:86 وَٱغْفِرْ لِأَبِىٓ إِنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ
26:86 और मेरे बाप को क्षमा कर दे। निश्चय ही वह पथभ्रष्ट लोगों में से है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:87 وَلَا تُخْزِنِى يَوْمَ يُبْعَثُونَ
26:87 और मुझे उस दिन रुसवा न कर, जब लोग जीवित करके उठाए जाएँगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:88 يَوْمَ لَا يَنفَعُ مَالٌ وَلَا بَنُونَ
26:88 जिस दिन न माल काम आएगा और न औलाद, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:89 إِلَّا مَنْ أَتَى ٱللَّهَ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ
26:89 सिवाय इसके कि कोई भला-चंगा दिल लिए हुए अल्लाह के पास आया हो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:90 وَأُزْلِفَتِ ٱلْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ
26:90 और डर रखनेवालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:91 وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِلْغَاوِينَ
26:91 और भडकती आग पथभ्रष्टि लोगों के लिए प्रकट कर दी जाएगी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:92 وَقِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ
26:92 और उनसे कहा जाएगा, "कहाँ है वे जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते रहे हो? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:93 مِن دُونِ ٱللَّهِ هَلْ يَنصُرُونَكُمْ أَوْ يَنتَصِرُونَ
26:93 क्या वे तुम्हारी कुछ सहायता कर रहे है या अपना ही बचाव कर सकते है?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:94 فَكُبْكِبُوا۟ فِيهَا هُمْ وَٱلْغَاوُۥنَ
26:94 फिर वे उसमें औंधे झोक दिए जाएँगे, वे और बहके हुए लोग - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:95 وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ
26:95 और इबलीस की सेनाएँ, सबके सब। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:96 قَالُوا۟ وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ
26:96 वे वहाँ आपस में झगड़ते हुए कहेंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:97 تَٱللَّهِ إِن كُنَّا لَفِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ
26:97 "अल्लाह की क़सम! निश्चय ही हम खुली गुमराही में थे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:98 إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:98 जबकि हम तुम्हें सारे संसार के रब के बराबर ठहरा रहे थे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:99 وَمَآ أَضَلَّنَآ إِلَّا ٱلْمُجْرِمُونَ
26:99 और हमें तो बस उन अपराधियों ने ही पथभ्रष्ट किया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:100 فَمَا لَنَا مِن شَـٰفِعِينَ
26:100 अब न हमारा कोई सिफ़ारिशी है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:101 وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍ
26:101 और न घनिष्ट मित्र - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:102 فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
26:102 क्या ही अच्छा होता कि हमें एक बार फिर पलटना होता, तो हम मोमिनों में से हो जाते!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:103 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:103 निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकरतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:104 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:104 और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:105 كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ ٱلْمُرْسَلِينَ
26:105 नूह की क़ौम ने रसूलों को झुठलाया; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:106 إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
26:106 जबकि उनसे उनके भाई नूह ने कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:107 إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
26:107 निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:108 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:108 अतः अल्लाह का डर रखो और मेरा कहा मानो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:109 وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:109 मैं इस काम के बदले तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:110 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:110 अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:111 ۞ قَالُوٓا۟ أَنُؤْمِنُ لَكَ وَٱتَّبَعَكَ ٱلْأَرْذَلُونَ
26:111 उन्होंने कहा, "क्या हम तेरी बात मान लें, जबकि तेरे पीछे तो अत्यन्त नीच लोग चल रहे है?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:112 قَالَ وَمَا عِلْمِى بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
26:112 उसने कहा, "मुझे क्या मालूम कि वे क्या करते रहे है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:113 إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّى ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ
26:113 उनका हिसाब तो बस मेरे रब के ज़िम्मे है। क्या ही अच्छा होता कि तुममें चेतना होती। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:114 وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
26:114 और मैं ईमानवालों को धुत्कारनेवाला नहीं हूँ। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:115 إِنْ أَنَا۠ إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
26:115 मैं तो बस स्पष्ट रूप से एक सावधान करनेवाला हूँ।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:116 قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَـٰنُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمَرْجُومِينَ
26:116 उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया ऐ नूह, तो तू संगसार होकर रहेगा।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:117 قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِى كَذَّبُونِ
26:117 उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम के लोगों ने तो मुझे झुठला दिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:118 فَٱفْتَحْ بَيْنِى وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِى وَمَن مَّعِىَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
26:118 अब मेरे और उनके बीच दो टूक फ़ैसला कर दे और मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ है, उन्हें बचा ले!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:119 فَأَنجَيْنَـٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ فِى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ
26:119 अतः हमने उसे और जो उसके साथ भरी हुई नौका में थे बचा लिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:120 ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ ٱلْبَاقِينَ
26:120 और उसके पश्चात शेष लोगों को डूबो दिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:121 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:121 निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:122 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:122 और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:123 كَذَّبَتْ عَادٌ ٱلْمُرْسَلِينَ
26:123 आद ने रसूलों को झूठलाया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:124 إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ
26:124 जबकि उनके भाई हूद ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:125 إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
26:125 मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:126 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:126 अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा मानो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:127 وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:127 मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़ि्म्मे है। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:128 أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ ءَايَةً تَعْبَثُونَ
26:128 क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:129 وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ
26:129 और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:130 وَإِذَا بَطَشْتُم بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ
26:130 और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो! - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:131 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:131 अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:132 وَٱتَّقُوا۟ ٱلَّذِىٓ أَمَدَّكُم بِمَا تَعْلَمُونَ
26:132 उसका डर रखो जिसने तुम्हें वे चीज़े पहुँचाई जिनको तुम जानते हो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:133 أَمَدَّكُم بِأَنْعَـٰمٍ وَبَنِينَ
26:133 उसने तुम्हारी सहायता की चौपायों और बेटों से, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:134 وَجَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
26:134 और बाग़ो और स्रोतो से - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:135 إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
26:135 निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:136 قَالُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْنَآ أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُن مِّنَ ٱلْوَٰعِظِينَ
26:136 उन्होंने कहा, "हमारे लिए बराबर है चाहे तुम नसीहत करो या नसीहत करने वाले न बनो। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:137 إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا خُلُقُ ٱلْأَوَّلِينَ
26:137 यह तो बस पहले लोगों की पुरानी आदत है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:138 وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
26:138 और हमें कदापि यातना न दी जाएगी।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:139 فَكَذَّبُوهُ فَأَهْلَكْنَـٰهُمْ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:139 अन्ततः उन्होंने उन्हें झुठला दिया जो हमने उनको विनष्ट कर दिया। बेशक इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:140 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:140 और बेशक तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:141 كَذَّبَتْ ثَمُودُ ٱلْمُرْسَلِينَ
26:141 समूद ने रसूलों को झुठलाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:142 إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَـٰلِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
26:142 जबकि उसके भाई सालेह ने उससे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:143 إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
26:143 निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:144 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:144 अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी बात मानो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:145 وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:145 मैं इस काम पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:146 أَتُتْرَكُونَ فِى مَا هَـٰهُنَآ ءَامِنِينَ
26:146 क्या तुम यहाँ जो कुछ है उसके बीच, निश्चिन्त छोड़ दिए जाओगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:147 فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
26:147 बाग़ों और स्रोतों - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:148 وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَضِيمٌ
26:148 और खेतों और उन खजूरों में जिनके गुच्छे तरो ताज़ा और गुँथे हुए है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:149 وَتَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا فَـٰرِهِينَ
26:149 तुम पहाड़ों को काट-काटकर इतराते हुए घर बनाते हो? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:150 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:150 अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:151 وَلَا تُطِيعُوٓا۟ أَمْرَ ٱلْمُسْرِفِينَ
26:151 और उन हद से गुज़र जानेवालों की आज्ञा का पालन न करो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:152 ٱلَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
26:152 जो धरती में बिगाड़ पैदा करते है, और सुधार का काम नहीं करते।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:153 قَالُوٓا۟ إِنَّمَآ أَنتَ مِنَ ٱلْمُسَحَّرِينَ
26:153 उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:154 مَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا فَأْتِ بِـَٔايَةٍ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
26:154 तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है। यदि तू सच्चा है, तो कोई निशानी ले आ।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:155 قَالَ هَـٰذِهِۦ نَاقَةٌ لَّهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ
26:155 उसने कहा, "यह ऊँटनी है। एक दिन पानी पीने की बारी इसकी है और एक नियत दिन की बारी पानी लेने की तुम्हारी है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:156 وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظِيمٍ
26:156 तकलीफ़ पहुँचाने के लिए इसे हाथ न लगाना, अन्यथा एक बड़े दिन की यातना तुम्हें आ लेगी।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:157 فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا۟ نَـٰدِمِينَ
26:157 किन्तु उन्होंने उसकी कूचें काट दी। फिर पछताते रह गए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:158 فَأَخَذَهُمُ ٱلْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:158 अन्ततः यातना ने उन्हें आ दबोचा। निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:159 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:159 और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयाशील है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:160 كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلِينَ
26:160 लूत की क़ौम के लोगों ने रसूलों को झुठलाया; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:161 إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ
26:161 जबकि उनके भाई लूत ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:162 إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
26:162 मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:163 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:163 अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:164 وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:164 मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता, मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:165 أَتَأْتُونَ ٱلذُّكْرَانَ مِنَ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:165 क्या सारे संसारवालों में से तुम ही ऐसे हो जो पुरुषों के पास जाते हो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:166 وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُم مِّنْ أَزْوَٰجِكُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ
26:166 और अपनी पत्नियों को, जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा किया, छोड़ देते हो? इतना ही नहीं, बल्कि तुम हद से आगे बढ़े हुए लोग हो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:167 قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَـٰلُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمُخْرَجِينَ
26:167 उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया, ऐ लतू! तो तू अवश्य ही निकाल बाहर किया जाएगा।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:168 قَالَ إِنِّى لِعَمَلِكُم مِّنَ ٱلْقَالِينَ
26:168 उसने कहा, "मैं तुम्हारे कर्म से अत्यन्त विरक्त हूँ। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:169 رَبِّ نَجِّنِى وَأَهْلِى مِمَّا يَعْمَلُونَ
26:169 ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे लोगों को, जो कुछ ये करते है उसके परिणाम से, बचा ले।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:170 فَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ
26:170 अन्ततः हमने उसे और उसके सारे लोगों को बचा लिया; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:171 إِلَّا عَجُوزًا فِى ٱلْغَـٰبِرِينَ
26:171 सिवाय एक बुढ़िया के जो पीछे रह जानेवालों में थी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:172 ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ
26:172 फिर शेष दूसरे लोगों को हमने विनष्ट कर दिया। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:173 وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلْمُنذَرِينَ
26:173 और हमने उनपर एक बरसात बरसाई। और यह चेताए हुए लोगों की बहुत ही बुरी वर्षा थी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:174 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:174 निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:175 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:175 और निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:176 كَذَّبَ أَصْحَـٰبُ لْـَٔيْكَةِ ٱلْمُرْسَلِينَ
26:176 अल-ऐकावालों ने रसूलों को झुठलाया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:177 إِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ أَلَا تَتَّقُونَ
26:177 जबकि शुऐब ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:178 إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
26:178 मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:179 فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
26:179 अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:180 وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:180 मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:181 ۞ أَوْفُوا۟ ٱلْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا۟ مِنَ ٱلْمُخْسِرِينَ
26:181 तुम पूरा-पूरा पैमाना भरो और घाटा न दो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:182 وَزِنُوا۟ بِٱلْقِسْطَاسِ ٱلْمُسْتَقِيمِ
26:182 और ठीक तराज़ू से तौलो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:183 وَلَا تَبْخَسُوا۟ ٱلنَّاسَ أَشْيَآءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا۟ فِى ٱلْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
26:183 और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो और धरती में बिगाड़ और फ़साद मचाते मत फिरो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:184 وَٱتَّقُوا۟ ٱلَّذِى خَلَقَكُمْ وَٱلْجِبِلَّةَ ٱلْأَوَّلِينَ
26:184 उसका डर रखो जिसने तुम्हें और पिछली नस्लों को पैदा किया हैं।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:185 قَالُوٓا۟ إِنَّمَآ أَنتَ مِنَ ٱلْمُسَحَّرِينَ
26:185 उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:186 وَمَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَإِن نَّظُنُّكَ لَمِنَ ٱلْكَـٰذِبِينَ
26:186 और तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है और हम तो तुझे झूठा समझते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:187 فَأَسْقِطْ عَلَيْنَا كِسَفًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
26:187 फिर तू हमपर आकाश को कोई टुकड़ा गिरा दे, यदि तू सच्चा है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:188 قَالَ رَبِّىٓ أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ
26:188 उसने कहा, " मेरा रब भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:189 فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمْ عَذَابُ يَوْمِ ٱلظُّلَّةِ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
26:189 किन्तु उन्होंने उसे झुठला दिया। फिर छायावाले दिन की यातना ने आ लिया। निश्चय ही वह एक बड़े दिन की यातना थी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:190 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
26:190 निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:191 وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
26:191 और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:192 وَإِنَّهُۥ لَتَنزِيلُ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
26:192 निश्चय ही यह (क़ुरआन) सारे संसार के रब की अवतरित की हुई चीज़ है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:193 نَزَلَ بِهِ ٱلرُّوحُ ٱلْأَمِينُ
26:193 इसको लेकर तुम्हारे हृदय पर एक विश्वसनीय आत्मा उतरी है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:194 عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ ٱلْمُنذِرِينَ
26:194 ताकि तुम सावधान करनेवाले हो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:195 بِلِسَانٍ عَرَبِىٍّ مُّبِينٍ
26:195 स्पष्ट अरबी भाषा में - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:196 وَإِنَّهُۥ لَفِى زُبُرِ ٱلْأَوَّلِينَ
26:196 और निस्संदेह यह पिछले लोगों की किताबों में भी मौजूद है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:197 أَوَلَمْ يَكُن لَّهُمْ ءَايَةً أَن يَعْلَمَهُۥ عُلَمَـٰٓؤُا۟ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ
26:197 क्या यह उनके लिए कोई निशानी नहीं है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:198 وَلَوْ نَزَّلْنَـٰهُ عَلَىٰ بَعْضِ ٱلْأَعْجَمِينَ
26:198 यदि हम इसे ग़ैर अरबी भाषी पर भी उतारते, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:199 فَقَرَأَهُۥ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ مُؤْمِنِينَ
26:199 और वह इसे उन्हें पढ़कर सुनाता तब भी वे इसे माननेवाले न होते - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:200 كَذَٰلِكَ سَلَكْنَـٰهُ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَ
26:200 इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के दिलों में पैठाया है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:201 لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ حَتَّىٰ يَرَوُا۟ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ
26:201 वे इसपर ईमान लाने को नहीं, जब तक कि दुखद यातना न देख लें - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:202 فَيَأْتِيَهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
26:202 फिर जब वह अचानक उनपर आ जाएगी और उन्हें ख़बर भी न होगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:203 فَيَقُولُوا۟ هَلْ نَحْنُ مُنظَرُونَ
26:203 तब वे कहेंगे, "क्या हमें कुछ मुहलत मिल सकती है?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:204 أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
26:204 तो क्या वे लोग हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:205 أَفَرَءَيْتَ إِن مَّتَّعْنَـٰهُمْ سِنِينَ
26:205 क्या तुमने कुछ विचार किया? यदि हम उन्हें कुछ वर्षों तक सुख भोगने दें; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:206 ثُمَّ جَآءَهُم مَّا كَانُوا۟ يُوعَدُونَ
26:206 फिर उनपर वह चीज़ आ जाए, जिससे उन्हें डराया जाता रहा है; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:207 مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يُمَتَّعُونَ
26:207 तो जो सुख उन्हें मिला होगा वह उनके कुछ काम न आएगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:208 وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ
26:208 हमने किसी बस्ती को भी इसके बिना विनष्ट नहीं किया कि उसके लिए सचेत करनेवाले याददिहानी के लिए मौजूद रहे हैं। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:209 ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ
26:209 हम कोई ज़ालिम नहीं है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:210 وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ ٱلشَّيَـٰطِينُ
26:210 इसे शैतान लेकर नहीं उतरे हैं। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:211 وَمَا يَنۢبَغِى لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ
26:211 न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:212 إِنَّهُمْ عَنِ ٱلسَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ
26:212 वे तो इसके सुनने से भी दूर रखे गए है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:213 فَلَا تَدْعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ فَتَكُونَ مِنَ ٱلْمُعَذَّبِينَ
26:213 अतः अल्लाह के साथ दूसरे इष्ट-पूज्य को न पुकारना, अन्यथा तुम्हें भी यातना दी जाएगी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:214 وَأَنذِرْ عَشِيرَتَكَ ٱلْأَقْرَبِينَ
26:214 और अपने निकटतम नातेदारों को सचेत करो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:215 وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
26:215 और जो ईमानवाले तुम्हारे अनुयायी हो गए है, उनके लिए अपनी भुजाएँ बिछाए रखो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:216 فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّى بَرِىٓءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
26:216 किन्तु यदि वे तुम्हारी अवज्ञा करें तो कह दो, "जो कुछ तुम करते हो, उसकी ज़िम्मेदारी से मं1 बरी हूँ।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:217 وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱلْعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ
26:217 और उस प्रभुत्वशाली और दया करनेवाले पर भरोसा रखो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:218 ٱلَّذِى يَرَىٰكَ حِينَ تَقُومُ
26:218 जो तुम्हें देख रहा होता है, जब तुम खड़े होते हो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:219 وَتَقَلُّبَكَ فِى ٱلسَّـٰجِدِينَ
26:219 और सजदा करनेवालों में तुम्हारे चलत-फिरत को भी वह देखता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:220 إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
26:220 निस्संदेह वह भली-भाँति सुनता-जानता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:221 هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ ٱلشَّيَـٰطِينُ
26:221 क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान किसपर उतरते है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:222 تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
26:222 वे प्रत्येक ढोंग रचनेवाले गुनाहगार पर उतरते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:223 يُلْقُونَ ٱلسَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَـٰذِبُونَ
26:223 वे कान लगाते है और उनमें से अधिकतर झूठे होते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:224 وَٱلشُّعَرَآءُ يَتَّبِعُهُمُ ٱلْغَاوُۥنَ
26:224 रहे कवि, तो उनके पीछे बहके हुए लोग ही चला करते है।- - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:225 أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِى كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ
26:225 क्या तुमने देखा नहीं कि वे हर घाटी में बहके फिरते हैं, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:226 وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ
26:226 और कहते वह है जो करते नहीं? - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

26:227 إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَذَكَرُوا۟ ٱللَّهَ كَثِيرًا وَٱنتَصَرُوا۟ مِنۢ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا۟ ۗ وَسَيَعْلَمُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓا۟ أَىَّ مُنقَلَبٍ يَنقَلِبُونَ
26:227 वे नहीं जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और अल्लाह को अधिक .याद किया। औऱ इसके बाद कि उनपर ज़ुल्म किया गया तो उन्होंने उसका प्रतिकार किया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा कि वे किस जगह पलटते हैं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)