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Farooq Khan and Ahmed

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102 At-Takāthur ٱلتَّكَاثُر

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

102:1 أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ
102:1 तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:2 حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَ
102:2 यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:3 كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ
102:3 कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:4 ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ
102:4 फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:5 كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِ
102:5 कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो) - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:6 لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَ
102:6 अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:7 ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِ
102:7 फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

102:8 ثُمَّ لَتُسْـَٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ
102:8 फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)