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Farooq Khan and Ahmed

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84 Al-'Inshiqāq ٱلْإِنْشِقَاق

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

84:1 إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ
84:1 जबकि आकाश फट जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:2 وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
84:2 और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:3 وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ
84:3 जब धरती फैला दी जाएगी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:4 وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ
84:4 और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:5 وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
84:5 और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:6 يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَـٰقِيهِ
84:6 ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:7 فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ
84:7 फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:8 فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًا يَسِيرًا
84:8 तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:9 وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا
84:9 और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:10 وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ
84:10 और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:11 فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًا
84:11 तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:12 وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا
84:12 और दहकती आग में जा पड़ेगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:13 إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا
84:13 वह अपने लोगों में मग्न था, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:14 إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ
84:14 उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:15 بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًا
84:15 क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था! - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:16 فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ
84:16 अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:17 وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَ
84:17 और रात की और उसके समेट लेने की, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:18 وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَ
84:18 और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:19 لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍ
84:19 निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:20 فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
84:20 फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:21 وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩
84:21 और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:22 بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ
84:22 नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:23 وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ
84:23 हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:24 فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
84:24 अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

84:25 إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ
84:25 अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)