Selected

Original Text
Suhel Khan and Saifur Nadwi

Available Translations

54 Al-Qamar ٱلْقَمَر

< Previous   55 Āyah   The Moon      Next >  

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

54:1 ٱقْتَرَبَتِ ٱلسَّاعَةُ وَٱنشَقَّ ٱلْقَمَرُ
54:1
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
क़यामत क़रीब आ गयी और चाँद दो टुकड़े हो गया

54:2 وَإِن يَرَوْا۟ ءَايَةً يُعْرِضُوا۟ وَيَقُولُوا۟ سِحْرٌ مُّسْتَمِرٌّ
54:2
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और अगर ये कुफ्फ़ार कोई मौजिज़ा देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं, और कहते हैं कि ये तो बड़ा ज़बरदस्त जादू है

54:3 وَكَذَّبُوا۟ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَهْوَآءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍ مُّسْتَقِرٌّ
54:3
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उन लोगों ने झुठलाया और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की, और हर काम का वक्त मुक़र्रर है

54:4 وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّنَ ٱلْأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ
54:4
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं

54:5 حِكْمَةٌۢ بَـٰلِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ ٱلنُّذُرُ
54:5
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता

54:6 فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ ٱلدَّاعِ إِلَىٰ شَىْءٍ نُّكُرٍ
54:6
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा

54:7 خُشَّعًا أَبْصَـٰرُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ
54:7
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं

54:8 مُّهْطِعِينَ إِلَى ٱلدَّاعِ ۖ يَقُولُ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
54:8
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है

54:9 ۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا۟ عَبْدَنَا وَقَالُوا۟ مَجْنُونٌ وَٱزْدُجِرَ
54:9
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है

54:10 فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنِّى مَغْلُوبٌ فَٱنتَصِرْ
54:10
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ

54:11 فَفَتَحْنَآ أَبْوَٰبَ ٱلسَّمَآءِ بِمَآءٍ مُّنْهَمِرٍ
54:11
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए

54:12 وَفَجَّرْنَا ٱلْأَرْضَ عُيُونًا فَٱلْتَقَى ٱلْمَآءُ عَلَىٰٓ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ
54:12
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम के लिए जो मुक़र्रर हो चुका था (दोनों) पानी मिलकर एक हो गया

54:13 وَحَمَلْنَـٰهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَٰحٍ وَدُسُرٍ
54:13
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी सवार किया

54:14 تَجْرِى بِأَعْيُنِنَا جَزَآءً لِّمَن كَانَ كُفِرَ
54:14
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और वह हमारी निगरानी में चल रही थी (ये) उस शख़्श (नूह) का बदला लेने के लिए जिसको लोग न मानते थे

54:15 وَلَقَد تَّرَكْنَـٰهَآ ءَايَةً فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
54:15
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने उसको एक इबरत बना कर छोड़ा तो कोई है जो इबरत हासिल करे

54:16 فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
54:16
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था

54:17 وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
54:17
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

54:18 كَذَّبَتْ عَادٌ فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
54:18
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
आद (की क़ौम ने) (अपने पैग़म्बर) को झुठलाया तो (उनका) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था,

54:19 إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِى يَوْمِ نَحْسٍ مُّسْتَمِرٍّ
54:19
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
हमने उन पर बहुत सख्त मनहूस दिन में बड़े ज़न्नाटे की ऑंधी चलायी

54:20 تَنزِعُ ٱلنَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُّنقَعِرٍ
54:20
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जो लोगों को (अपनी जगह से) इस तरह उखाड़ फेकती थी गोया वह उखड़े हुए खजूर के तने हैं

54:21 فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
54:21
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था

54:22 وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
54:22
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

54:23 كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِٱلنُّذُرِ
54:23
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(क़ौम) समूद ने डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया

54:24 فَقَالُوٓا۟ أَبَشَرًا مِّنَّا وَٰحِدًا نَّتَّبِعُهُۥٓ إِنَّآ إِذًا لَّفِى ضَلَـٰلٍ وَسُعُرٍ
54:24
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो कहने लगे कि भला एक आदमी की जो हम ही में से हो उसकी पैरवीं करें ऐसा करें तो गुमराही और दीवानगी में पड़ गए

54:25 أَءُلْقِىَ ٱلذِّكْرُ عَلَيْهِ مِنۢ بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ
54:25
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
क्या हम सबमें बस उसी पर वही नाज़िल हुई है (नहीं) बल्कि ये तो बड़ा झूठा तअल्ली करने वाला है

54:26 سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ ٱلْكَذَّابُ ٱلْأَشِرُ
54:26
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है

54:27 إِنَّا مُرْسِلُوا۟ ٱلنَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَٱرْتَقِبْهُمْ وَٱصْطَبِرْ
54:27
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो

54:28 وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ ٱلْمَآءَ قِسْمَةٌۢ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ
54:28
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए

54:29 فَنَادَوْا۟ صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
54:29
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं

54:30 فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
54:30
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था

54:31 إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَٰحِدَةً فَكَانُوا۟ كَهَشِيمِ ٱلْمُحْتَظِرِ
54:31
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए

54:32 وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
54:32
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

54:33 كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍۭ بِٱلنُّذُرِ
54:33
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया

54:34 إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَـٰهُم بِسَحَرٍ
54:34
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत के लड़के बाले को हमने उनको अपने फज़ल व करम से पिछले ही को बचा लिया

54:35 نِّعْمَةً مِّنْ عِندِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى مَن شَكَرَ
54:35
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
हम शुक्र करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

54:36 وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا۟ بِٱلنُّذُرِ
54:36
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और लूत ने उनको हमारी पकड़ से भी डराया था मगर उन लोगों ने डराते ही में शक़ किया

54:37 وَلَقَدْ رَٰوَدُوهُ عَن ضَيْفِهِۦ فَطَمَسْنَآ أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا۟ عَذَابِى وَنُذُرِ
54:37
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उनसे उनके मेहमान (फ़रिश्ते) के बारे में नाजायज़ मतलब की ख्वाहिश की तो हमने उनकी ऑंखें अन्धी कर दीं तो मेरे अज़ाब और डराने का मज़ा चखो

54:38 وَلَقَدْ صَبَّحَهُم بُكْرَةً عَذَابٌ مُّسْتَقِرٌّ
54:38
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और सुबह सवेरे ही उन पर अज़ाब आ गया जो किसी तरह टल ही नहीं सकता था

54:39 فَذُوقُوا۟ عَذَابِى وَنُذُرِ
54:39
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो मेरे अज़ाब और डराने के (पड़े) मज़े चखो

54:40 وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
54:40
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

54:41 وَلَقَدْ جَآءَ ءَالَ فِرْعَوْنَ ٱلنُّذُرُ
54:41
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और फिरऔन के पास भी डराने वाले (पैग़म्बर) आए

54:42 كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَـٰهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُّقْتَدِرٍ
54:42
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो हमने उनको इस तरह सख्त पकड़ा जिस तरह एक ज़बरदस्त साहिबे क़ुदरत पकड़ा करता है

54:43 أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُو۟لَـٰٓئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَآءَةٌ فِى ٱلزُّبُرِ
54:43
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है

54:44 أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ
54:44
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं

54:45 سَيُهْزَمُ ٱلْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ ٱلدُّبُرَ
54:45
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे

54:46 بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَٱلسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
54:46
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है

54:47 إِنَّ ٱلْمُجْرِمِينَ فِى ضَلَـٰلٍ وَسُعُرٍ
54:47
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं

54:48 يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِى ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا۟ مَسَّ سَقَرَ
54:48
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो

54:49 إِنَّا كُلَّ شَىْءٍ خَلَقْنَـٰهُ بِقَدَرٍ
54:49
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है

54:50 وَمَآ أَمْرُنَآ إِلَّا وَٰحِدَةٌ كَلَمْحٍۭ بِٱلْبَصَرِ
54:50
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है

54:51 وَلَقَدْ أَهْلَكْنَآ أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
54:51
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

54:52 وَكُلُّ شَىْءٍ فَعَلُوهُ فِى ٱلزُّبُرِ
54:52
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है

54:53 وَكُلُّ صَغِيرٍ وَكَبِيرٍ مُّسْتَطَرٌ
54:53
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(यानि) हर छोटा और बड़ा काम लिख दिया गया है

54:54 إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَنَهَرٍ
54:54
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और नहरों में

54:55 فِى مَقْعَدِ صِدْقٍ عِندَ مَلِيكٍ مُّقْتَدِرٍۭ
54:55
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(यानि) पसन्दीदा मक़ाम में हर तरह की कुदरत रखने वाले बादशाह की बारगाह में (मुक़र्रिब) होंगे