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Original Text
Farooq Khan and Ahmed
Abdullah Yusuf Ali
Abdul Majid Daryabadi
Abul Ala Maududi
Ahmed Ali
Ahmed Raza Khan
A. J. Arberry
Ali Quli Qarai
Hasan al-Fatih Qaribullah and Ahmad Darwish
Mohammad Habib Shakir
Mohammed Marmaduke William Pickthall
Muhammad Sarwar
Muhammad Taqi-ud-Din al-Hilali and Muhammad Muhsin Khan
Safi-ur-Rahman al-Mubarakpuri
Saheeh International
Talal Itani
Transliteration
Wahiduddin Khan
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.
52:1
وَٱلطُّورِ
52:1
गवाह है तूर पर्वत, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:2
وَكِتَـٰبٍ مَّسْطُورٍ
52:2
और लिखी हुई किताब; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:3
فِى رَقٍّ مَّنشُورٍ
52:3
फैले हुए झिल्ली के पन्ने में - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:4
وَٱلْبَيْتِ ٱلْمَعْمُورِ
52:4
और बसा हुआ घर; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:5
وَٱلسَّقْفِ ٱلْمَرْفُوعِ
52:5
और ऊँची छत; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:6
وَٱلْبَحْرِ ٱلْمَسْجُورِ
52:6
और उफनता समुद्र - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:7
إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٌ
52:7
कि तेरे रब की यातना अवश्य घटित होकर रहेगी; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:8
مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٍ
52:8
जिसे टालनेवाला कोई नहीं; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:9
يَوْمَ تَمُورُ ٱلسَّمَآءُ مَوْرًا
52:9
जिस दिल आकाश बुरी तरह डगमगाएगा; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:10
وَتَسِيرُ ٱلْجِبَالُ سَيْرًا
52:10
और पहाड़ चलते-फिरते होंगे; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:11
فَوَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
52:11
तो तबाही है उस दिन, झुठलानेवालों के लिए; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:12
ٱلَّذِينَ هُمْ فِى خَوْضٍ يَلْعَبُونَ
52:12
जो बात बनाने में लगे हुए खेल रहे है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:13
يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا
52:13
जिस दिन वे धक्के दे-देकर जहन्नम की ओर ढकेले जाएँगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:14
هَـٰذِهِ ٱلنَّارُ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
52:14
(कहा जाएगा), "यही है वह आग जिसे तुम झुठलाते थे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:15
أَفَسِحْرٌ هَـٰذَآ أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ
52:15
"अब भला (बताओ) यह कोई जादू है या तुम्हे सुझाई नहीं देता? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:16
ٱصْلَوْهَا فَٱصْبِرُوٓا۟ أَوْ لَا تَصْبِرُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
52:16
"जाओ, झुलसो उसमें! अब धैर्य से काम लो या धैर्य से काम न लो; तुम्हारे लिए बराबर है। तुम वही बदला पा रहे हो, जो तुम करते रहे थे।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:17
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَنَعِيمٍ
52:17
निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और नेमतों में होंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:18
فَـٰكِهِينَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ
52:18
जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया होगा, उसका आनन्द ले रहे होंगे और इस बात से कि उनके रब ने उन्हें भड़कती हुई आग से बचा लिया - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:19
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
52:19
"मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:20
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ سُرُرٍ مَّصْفُوفَةٍ ۖ وَزَوَّجْنَـٰهُم بِحُورٍ عِينٍ
52:20
- पंक्तिबद्ध तख़्तो पर तकिया लगाए हुए होंगे और हम बड़ी आँखोंवाली हूरों (परम रूपवती स्त्रियों) से उनका विवाह कर देंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:21
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَـٰنٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَآ أَلَتْنَـٰهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَىْءٍ ۚ كُلُّ ٱمْرِئٍۭ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ
52:21
जो लोग ईमान लाए और उनकी सन्तान ने भी ईमान के साथ उसका अनुसरण किया, उनकी सन्तान को भी हम उनसे मिला देंगे, और उनके कर्म में से कुछ भी कम करके उन्हें नहीं देंगे। हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले में बन्धक है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:22
وَأَمْدَدْنَـٰهُم بِفَـٰكِهَةٍ وَلَحْمٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ
52:22
और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:23
يَتَنَـٰزَعُونَ فِيهَا كَأْسًا لَّا لَغْوٌ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌ
52:23
वे वहाँ आपस में प्याले हाथोंहाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारनेवाली कोई बात, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:24
۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَّكْنُونٌ
52:24
और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:25
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ
52:25
उनमें से कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियों की ओर हाल पूछते हुए रुख़ करेंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:26
قَالُوٓا۟ إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِىٓ أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ
52:26
कहेंगे, "निश्चय ही हम पहले अपने घरवालों में डरते रहे है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:27
فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَىٰنَا عَذَابَ ٱلسَّمُومِ
52:27
"अन्ततः अल्लाह ने हमपर एहसास किया और हमें गर्म विषैली वायु की यातना से बचा लिया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:28
إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْبَرُّ ٱلرَّحِيمُ
52:28
"इससे पहले हम उसे पुकारते रहे है। निश्चय ही वह सदव्यवहार करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:29
فَذَكِّرْ فَمَآ أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ
52:29
अतः तुम याद दिलाते रहो। अपने रब की अनुकम्पा से न तुम काहिन (ढोंगी भविष्यवक्ता) हो और न दीवाना - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:30
أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِۦ رَيْبَ ٱلْمَنُونِ
52:30
या वे कहते है, "वह कवि है जिसके लिए हम काल-चक्र की प्रतीक्षा कर रहे है?" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:31
قُلْ تَرَبَّصُوا۟ فَإِنِّى مَعَكُم مِّنَ ٱلْمُتَرَبِّصِينَ
52:31
कह दो, "प्रतीक्षा करो! मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:32
أَمْ تَأْمُرُهُمْ أَحْلَـٰمُهُم بِهَـٰذَآ ۚ أَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
52:32
या उनकी बुद्धियाँ यही आदेश दे रही है, या वे ही है सरकश लोग? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:33
أَمْ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُۥ ۚ بَل لَّا يُؤْمِنُونَ
52:33
या वे कहते है, "उसने उस (क़ुरआन) को स्वयं ही कह लिया है?" नहीं, बल्कि वे ईमान नहीं लाते - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:34
فَلْيَأْتُوا۟ بِحَدِيثٍ مِّثْلِهِۦٓ إِن كَانُوا۟ صَـٰدِقِينَ
52:34
अच्छा यदि वे सच्चे है तो उन्हें उस जैसी वाणी ले आनी चाहिए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:35
أَمْ خُلِقُوا۟ مِنْ غَيْرِ شَىْءٍ أَمْ هُمُ ٱلْخَـٰلِقُونَ
52:35
या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए? या वे स्वयं ही अपने स्रष्टाँ है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:36
أَمْ خَلَقُوا۟ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ
52:36
या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:37
أَمْ عِندَهُمْ خَزَآئِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ ٱلْمُصَۣيْطِرُونَ
52:37
या उनके पास तुम्हारे रब के खज़ाने है? या वही उनके परिरक्षक है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:38
أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ
52:38
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़कर वे (कान लगाकर) सुन लेते है? फिर उनमें से जिसने सुन लिया हो तो वह ले आए स्पष्ट प्रमाण - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:39
أَمْ لَهُ ٱلْبَنَـٰتُ وَلَكُمُ ٱلْبَنُونَ
52:39
या उस (अल्लाह) के लिए बेटियाँ है और तुम्हारे अपने लिए बेटे? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:40
أَمْ تَسْـَٔلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
52:40
या तुम उनसे कोई पारिश्रामिक माँगते हो कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:41
أَمْ عِندَهُمُ ٱلْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
52:41
या उनके पास परोक्ष (स्पष्ट) है जिसके आधार पर वे लिए रहे हो? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:42
أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ هُمُ ٱلْمَكِيدُونَ
52:42
या वे कोई चाल चलना चाहते है? तो जिन लोगों ने इनकार किया वही चाल की लपेट में आनेवाले है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:43
أَمْ لَهُمْ إِلَـٰهٌ غَيْرُ ٱللَّهِ ۚ سُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
52:43
या अल्लाह के अतिरिक्त उनका कोई और पूज्य-प्रभु है? अल्लाह महान और उच्च है उससे जो वे साझी ठहराते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:44
وَإِن يَرَوْا۟ كِسْفًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ سَاقِطًا يَقُولُوا۟ سَحَابٌ مَّرْكُومٌ
52:44
यदि वे आकाश का कोई टुकटा गिरता हुआ देखें तो कहेंगे, "यह तो परत पर परत बादल है!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:45
فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى فِيهِ يُصْعَقُونَ
52:45
अतः छोडो उन्हें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन का सामना करें जिसमें उनपर वज्रपात होगा; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:46
يَوْمَ لَا يُغْنِى عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْـًٔا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
52:46
जिस दिन उनकी चाल उनके कुछ भी काम न आएगी और न उन्हें कोई सहायता ही मिलेगी; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:47
وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
52:47
और निश्चय ही जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उनके लिए एक यातना है उससे हटकर भी, परन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:48
وَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعْيُنِنَا ۖ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ
52:48
अपने रब का फ़ैसला आने तक धैर्य से काम लो, तुम तो हमारी आँखों में हो, और जब उठो तो अपने रब का गुणगान करो; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
52:49
وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَإِدْبَـٰرَ ٱلنُّجُومِ
52:49
रात की कुछ घड़ियों में भी उसकी तसबीह करो, और सितारों के पीठ फेरने के समय (प्रातःकाल) भी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)