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Farooq Khan and Ahmed

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88 Al-Ghāshiyah ٱلْغَاشِيَة

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

88:1 هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْغَـٰشِيَةِ
88:1 क्या तुम्हें उस छा जानेवाली की ख़बर पहुँची है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:2 وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَـٰشِعَةٌ
88:2 उस दिन कितने ही चेहरे गिरे हुए होंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:3 عَامِلَةٌ نَّاصِبَةٌ
88:3 कठिन परिश्रम में पड़े, थके-हारे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:4 تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً
88:4 दहकती आग में प्रवेश करेंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:5 تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ ءَانِيَةٍ
88:5 खौलते हुए स्रोत से पिएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:6 لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍ
88:6 उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:7 لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِى مِن جُوعٍ
88:7 जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:8 وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاعِمَةٌ
88:8 उस दिन कितने ही चेहरे प्रफुल्लित और सौम्य होंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:9 لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌ
88:9 अपने प्रयास पर प्रसन्न, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:10 فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
88:10 उच्च जन्नत में, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:11 لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَـٰغِيَةً
88:11 जिसमें कोई व्यर्थ बात न सुनेंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:12 فِيهَا عَيْنٌ جَارِيَةٌ
88:12 उसमें स्रोत प्रवाहित होगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:13 فِيهَا سُرُرٌ مَّرْفُوعَةٌ
88:13 उसमें ऊँची-ऊँची मसनदें होगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:14 وَأَكْوَابٌ مَّوْضُوعَةٌ
88:14 प्याले ढंग से रखे होंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:15 وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ
88:15 क्रम से गाव तकिए लगे होंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:16 وَزَرَابِىُّ مَبْثُوثَةٌ
88:16 और हर ओर क़ालीने बिछी होंगी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:17 أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى ٱلْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
88:17 फिर क्या वे ऊँट की ओर नहीं देखते कि कैसा बनाया गया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:18 وَإِلَى ٱلسَّمَآءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
88:18 और आकाश की ओर कि कैसा ऊँचा किया गया? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:19 وَإِلَى ٱلْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
88:19 और पहाड़ो की ओर कि कैसे खड़े किए गए? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:20 وَإِلَى ٱلْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
88:20 और धरती की ओर कि कैसी बिछाई गई? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:21 فَذَكِّرْ إِنَّمَآ أَنتَ مُذَكِّرٌ
88:21 अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:22 لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ
88:22 तुम उनपर कोई दरोग़ा नही हो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:23 إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ
88:23 किन्तु जिस किसी ने मुँह फेरा और इनकार किया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:24 فَيُعَذِّبُهُ ٱللَّهُ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَكْبَرَ
88:24 तो अल्लाह उसे बड़ी यातना देगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:25 إِنَّ إِلَيْنَآ إِيَابَهُمْ
88:25 निस्संदेह हमारी ओर ही है उनका लौटना, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

88:26 ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم
88:26 फिर हमारे ही ज़िम्मे है उनका हिसाब लेना - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)