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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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100 Al-`Ādiyāt ٱلْعَادِيَات

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

100:1 وَٱلْعَـٰدِيَـٰتِ ضَبْحًا
100:1 (ग़ाज़ियों के) सरपट दौड़ने वाले घोड़ो की क़सम - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:2 فَٱلْمُورِيَـٰتِ قَدْحًا
100:2 जो नथनों से फ़रराटे लेते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:3 فَٱلْمُغِيرَٰتِ صُبْحًا
100:3 फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह को छापा मारते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:4 فَأَثَرْنَ بِهِۦ نَقْعًا
100:4 (तो दौड़ धूप से) बुलन्द कर देते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:5 فَوَسَطْنَ بِهِۦ جَمْعًا
100:5 फिर उस वक्त (दुश्मन के) दिल में घुस जाते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:6 إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لِرَبِّهِۦ لَكَنُودٌ
100:6 (ग़रज़ क़सम है) कि बेशक इन्सान अपने परवरदिगार का नाशुक्रा है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:7 وَإِنَّهُۥ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌ
100:7 और यक़ीनी ख़ुदा भी उससे वाक़िफ़ है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:8 وَإِنَّهُۥ لِحُبِّ ٱلْخَيْرِ لَشَدِيدٌ
100:8 और बेशक वह माल का सख्त हरीस है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:9 ۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِى ٱلْقُبُورِ
100:9 तो क्या वह ये नहीं जानता कि जब मुर्दे क़ब्रों से निकाले जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:10 وَحُصِّلَ مَا فِى ٱلصُّدُورِ
100:10 और दिलों के भेद ज़ाहिर कर दिए जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

100:11 إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّخَبِيرٌۢ
100:11 बेशक उस दिन उनका परवरदिगार उनसे ख़ूब वाक़िफ़ होगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)