Selected
Original Text
Farooq Khan and Ahmed
Abdullah Yusuf Ali
Abdul Majid Daryabadi
Abul Ala Maududi
Ahmed Ali
Ahmed Raza Khan
A. J. Arberry
Ali Quli Qarai
Hasan al-Fatih Qaribullah and Ahmad Darwish
Mohammad Habib Shakir
Mohammed Marmaduke William Pickthall
Muhammad Sarwar
Muhammad Taqi-ud-Din al-Hilali and Muhammad Muhsin Khan
Safi-ur-Rahman al-Mubarakpuri
Saheeh International
Talal Itani
Transliteration
Wahiduddin Khan
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.
81:1
إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ
81:1
जब सूर्य लपेट दिया जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:2
وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ
81:2
सारे तारे मैले हो जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:3
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ
81:3
जब पहाड़ चलाए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:4
وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ
81:4
जब दस मास की गाभिन ऊँटनियाँ आज़ाद छोड़ दी जाएँगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:5
وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ
81:5
जब जंगली जानवर एकत्र किए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:6
وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ
81:6
जब समुद्र भड़का दिया जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:7
وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ
81:7
जब लोग क़िस्म-क़िस्म कर दिए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:8
وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ
81:8
और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:9
بِأَىِّ ذَنۢبٍ قُتِلَتْ
81:9
कि उसकी हत्या किस गुनाह के कारण की गई, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:10
وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ
81:10
और जब कर्म-पत्र फैला दिए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:11
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ
81:11
और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:12
وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ
81:12
जब जहन्नम को दहकाया जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:13
وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ
81:13
और जब जन्नत निकट कर दी जाएगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:14
عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّآ أَحْضَرَتْ
81:14
तो कोई भी क्यक्ति जान लेगा कि उसने क्या उपस्थित किया है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:15
فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ
81:15
अतः नहीं! मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटनेवालों की, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:16
ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ
81:16
चलनेवालों, छिपने-दुबकने-वालों की - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:17
وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
81:17
साक्षी है रात्रि जब वह प्रस्थान करे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:18
وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
81:18
और साक्षी है प्रातः जब वह साँस ले - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:19
إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
81:19
निश्चय ही वह एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:20
ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍ
81:20
जो शक्तिवाला है, सिंहासनवाले के यहाँ जिसकी पैठ है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:21
مُّطَاعٍ ثَمَّ أَمِينٍ
81:21
उसका आदेश माना जाता है, वहाँ वह विश्वासपात्र है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:22
وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍ
81:22
तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:23
وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ
81:23
उसने तो (पराकाष्ठान के) प्रत्यक्ष क्षितिज पर होकर उस (फ़रिश्ते) को देखा है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:24
وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍ
81:24
और वह परोक्ष के मामले में कृपण नहीं है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:25
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَـٰنٍ رَّجِيمٍ
81:25
और वह (क़ुरआन) किसी धुतकारे हुए शैतान की लाई हुई वाणी नहीं है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:26
فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
81:26
फिर तुम किधर जा रहे हो? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:27
إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَـٰلَمِينَ
81:27
वह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मृति है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:28
لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ
81:28
उसके लिए तो तुममे से सीधे मार्ग पर चलना चाहे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
81:29
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
81:29
और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि सारे जहान का रब अल्लाह चाहे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)