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Farooq Khan and Ahmed

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81 At-Takwīr ٱلتَّكْوِير

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

81:1 إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ
81:1 जब सूर्य लपेट दिया जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:2 وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ
81:2 सारे तारे मैले हो जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:3 وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ
81:3 जब पहाड़ चलाए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:4 وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ
81:4 जब दस मास की गाभिन ऊँटनियाँ आज़ाद छोड़ दी जाएँगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:5 وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ
81:5 जब जंगली जानवर एकत्र किए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:6 وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ
81:6 जब समुद्र भड़का दिया जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:7 وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ
81:7 जब लोग क़िस्म-क़िस्म कर दिए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:8 وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ
81:8 और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:9 بِأَىِّ ذَنۢبٍ قُتِلَتْ
81:9 कि उसकी हत्या किस गुनाह के कारण की गई, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:10 وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ
81:10 और जब कर्म-पत्र फैला दिए जाएँगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:11 وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ
81:11 और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:12 وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ
81:12 जब जहन्नम को दहकाया जाएगा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:13 وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ
81:13 और जब जन्नत निकट कर दी जाएगी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:14 عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّآ أَحْضَرَتْ
81:14 तो कोई भी क्यक्ति जान लेगा कि उसने क्या उपस्थित किया है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:15 فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ
81:15 अतः नहीं! मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटनेवालों की, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:16 ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ
81:16 चलनेवालों, छिपने-दुबकने-वालों की - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:17 وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
81:17 साक्षी है रात्रि जब वह प्रस्थान करे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:18 وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
81:18 और साक्षी है प्रातः जब वह साँस ले - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:19 إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
81:19 निश्चय ही वह एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:20 ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍ
81:20 जो शक्तिवाला है, सिंहासनवाले के यहाँ जिसकी पैठ है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:21 مُّطَاعٍ ثَمَّ أَمِينٍ
81:21 उसका आदेश माना जाता है, वहाँ वह विश्वासपात्र है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:22 وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍ
81:22 तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:23 وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ
81:23 उसने तो (पराकाष्ठान के) प्रत्यक्ष क्षितिज पर होकर उस (फ़रिश्ते) को देखा है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:24 وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍ
81:24 और वह परोक्ष के मामले में कृपण नहीं है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:25 وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَـٰنٍ رَّجِيمٍ
81:25 और वह (क़ुरआन) किसी धुतकारे हुए शैतान की लाई हुई वाणी नहीं है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:26 فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
81:26 फिर तुम किधर जा रहे हो? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:27 إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَـٰلَمِينَ
81:27 वह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मृति है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:28 لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ
81:28 उसके लिए तो तुममे से सीधे मार्ग पर चलना चाहे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

81:29 وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
81:29 और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि सारे जहान का रब अल्लाह चाहे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)