Selected

Original Text
Suhel Khan and Saifur Nadwi

Available Translations

55 Ar-Raĥmān ٱلرَّحْمَٰن

< Previous   78 Āyah   The Beneficent      Next >  

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

55:1 ٱلرَّحْمَـٰنُ
55:1
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
बड़ा मेहरबान (ख़ुदा)

55:2 عَلَّمَ ٱلْقُرْءَانَ
55:2
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उसी ने क़ुरान की तालीम फरमाई

55:3 خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ
55:3
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उसी ने इन्सान को पैदा किया

55:4 عَلَّمَهُ ٱلْبَيَانَ
55:4
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उसी ने उनको (अपना मतलब) बयान करना सिखाया

55:5 ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ بِحُسْبَانٍ
55:5
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
सूरज और चाँद एक मुक़र्रर हिसाब से चल रहे हैं

55:6 وَٱلنَّجْمُ وَٱلشَّجَرُ يَسْجُدَانِ
55:6
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और बूटियाँ बेलें, और दरख्त (उसी को) सजदा करते हैं

55:7 وَٱلسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ ٱلْمِيزَانَ
55:7
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उसी ने आसमान बुलन्द किया और तराजू (इन्साफ) को क़ायम किया

55:8 أَلَّا تَطْغَوْا۟ فِى ٱلْمِيزَانِ
55:8
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ताकि तुम लोग तराज़ू (से तौलने) में हद से तजाउज़ न करो

55:9 وَأَقِيمُوا۟ ٱلْوَزْنَ بِٱلْقِسْطِ وَلَا تُخْسِرُوا۟ ٱلْمِيزَانَ
55:9
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और ईन्साफ के साथ ठीक तौलो और तौल कम न करो

55:10 وَٱلْأَرْضَ وَضَعَهَا لِلْأَنَامِ
55:10
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उसी ने लोगों के नफे क़े लिए ज़मीन बनायी

55:11 فِيهَا فَـٰكِهَةٌ وَٱلنَّخْلُ ذَاتُ ٱلْأَكْمَامِ
55:11
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
कि उसमें मेवे और खजूर के दरख्त हैं जिसके ख़ोशों में ग़िलाफ़ होते हैं

55:12 وَٱلْحَبُّ ذُو ٱلْعَصْفِ وَٱلرَّيْحَانُ
55:12
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और अनाज जिसके साथ भुस होता है और ख़ुशबूदार फूल

55:13 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:13
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों को न मानोगे

55:14 خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍ كَٱلْفَخَّارِ
55:14
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उसी ने इन्सान को ठीकरे की तरह खन खनाती हुई मिटटी से पैदा किया

55:15 وَخَلَقَ ٱلْجَآنَّ مِن مَّارِجٍ مِّن نَّارٍ
55:15
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और उसी ने जिन्नात को आग के शोले से पैदा किया

55:16 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:16
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों से मुकरोगे

55:17 رَبُّ ٱلْمَشْرِقَيْنِ وَرَبُّ ٱلْمَغْرِبَيْنِ
55:17
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
वही जाड़े गर्मी के दोनों मशरिकों का मालिक है और दोनों मग़रिबों का (भी) मालिक है

55:18 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:18
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ जिनों) और (आदमियों) तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

55:19 مَرَجَ ٱلْبَحْرَيْنِ يَلْتَقِيَانِ
55:19
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उसी ने दरिया बहाए जो बाहम मिल जाते हैं

55:20 بَيْنَهُمَا بَرْزَخٌ لَّا يَبْغِيَانِ
55:20
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
दो के दरमियान एक हद्दे फ़ासिल (आड़) है जिससे तजाउज़ नहीं कर सकते

55:21 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:21
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

55:22 يَخْرُجُ مِنْهُمَا ٱللُّؤْلُؤُ وَٱلْمَرْجَانُ
55:22
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
इन दोनों दरियाओं से मोती और मूँगे निकलते हैं

55:23 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:23
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(तो जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत को न मानोगे

55:24 وَلَهُ ٱلْجَوَارِ ٱلْمُنشَـَٔاتُ فِى ٱلْبَحْرِ كَٱلْأَعْلَـٰمِ
55:24
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और जहाज़ जो दरिया में पहाड़ों की तरह ऊँचे खड़े रहते हैं उसी के हैं

55:25 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:25
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो (ऐ जिन व इन्स) तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

55:26 كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ
55:26
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
जो (मख़लूक) ज़मीन पर है सब फ़ना होने वाली है

55:27 وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ
55:27
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी

55:28 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:28
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

55:29 يَسْـَٔلُهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِى شَأْنٍ
55:29
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है

55:30 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:30
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की कौन कौन सी नेअमत से मुकरोगे

55:31 سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ ٱلثَّقَلَانِ
55:31
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(ऐ दोनों गिरोहों) हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ मुतावज्जे होंगे

55:32 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:32
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत को न मानोगे

55:33 يَـٰمَعْشَرَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ إِنِ ٱسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا۟ مِنْ أَقْطَارِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ فَٱنفُذُوا۟ ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَـٰنٍ
55:33
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ऐ गिरोह जिन व इन्स अगर तुममें क़ुदरत है कि आसमानों और ज़मीन के किनारों से (होकर कहीं) निकल (कर मौत या अज़ाब से भाग) सको तो निकल जाओ (मगर) तुम तो बग़ैर क़ूवत और ग़लबे के निकल ही नहीं सकते (हालॉ कि तुममें न क़ूवत है और न ही ग़लबा)

55:34 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:34
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

55:35 يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِّن نَّارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنتَصِرَانِ
55:35
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(गुनाहगार जिनों और आदमियों जहन्नुम में) तुम दोनो पर आग का सब्ज़ शोला और सियाह धुऑं छोड़ दिया जाएगा तो तुम दोनों (किस तरह) रोक नहीं सकोगे

55:36 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:36
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

55:37 فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَٱلدِّهَانِ
55:37
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर जब आसमान फट कर (क़यामत में) तेल की तरह लाल हो जाऐगा

55:38 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:38
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे

55:39 فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُسْـَٔلُ عَن ذَنۢبِهِۦٓ إِنسٌ وَلَا جَآنٌّ
55:39
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो उस दिन न तो किसी इन्सान से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा न किसी जिन से

55:40 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:40
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को न मानोगे

55:41 يُعْرَفُ ٱلْمُجْرِمُونَ بِسِيمَـٰهُمْ فَيُؤْخَذُ بِٱلنَّوَٰصِى وَٱلْأَقْدَامِ
55:41
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
गुनाहगार लोग तो अपने चेहरों ही से पहचान लिए जाएँगे तो पेशानी के पटटे और पाँव पकड़े (जहन्नुम में डाल दिये जाएँगे)

55:42 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:42
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
आख़िर तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

55:43 هَـٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِى يُكَذِّبُ بِهَا ٱلْمُجْرِمُونَ
55:43
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(फिर उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे गुनाहगार लोग झुठलाया करते थे

55:44 يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ ءَانٍ
55:44
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ये लोग दोज़ख़ और हद दरजा खौलते हुए पानी के दरमियान (बेक़रार दौड़ते) चक्कर लगाते फिरेंगे

55:45 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:45
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को न मानोगे

55:46 وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ
55:46
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
और जो शख्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता रहा उसके लिए दो दो बाग़ हैं

55:47 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:47
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे

55:48 ذَوَاتَآ أَفْنَانٍ
55:48
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
दोनों बाग़ (दरख्तों की) टहनियों से हरे भरे (मेवों से लदे) हुए

55:49 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:49
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर दोनों अपने सरपरस्त की किस किस नेअमतों को झुठलाओगे

55:50 فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ
55:50
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
इन दोनों में दो चश्में जारी होंगें

55:51 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:51
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे

55:52 فِيهِمَا مِن كُلِّ فَـٰكِهَةٍ زَوْجَانِ
55:52
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
इन दोनों बाग़ों में सब मेवे दो दो किस्म के होंगे

55:53 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:53
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

55:54 مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ فُرُشٍۭ بَطَآئِنُهَا مِنْ إِسْتَبْرَقٍ ۚ وَجَنَى ٱلْجَنَّتَيْنِ دَانٍ
55:54
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
यह लोग उन फ़र्शों पर जिनके असतर अतलस के होंगे तकिये लगाकर बैठे होंगे तो दोनों बाग़ों के मेवे (इस क़दर) क़रीब होंगे (कि अगर चाहे तो लगे हुए खालें)

55:55 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:55
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को न मानोगे

55:56 فِيهِنَّ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَآنٌّ
55:56
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
इसमें (पाक दामन ग़ैर की तरफ ऑंख उठा कर न देखने वाली औरतें होंगी जिनको उन से पहले न किसी इन्सान ने हाथ लगाया होगा) और जिन ने

55:57 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:57
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

55:58 كَأَنَّهُنَّ ٱلْيَاقُوتُ وَٱلْمَرْجَانُ
55:58
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(ऐसी हसीन) गोया वह (मुजस्सिम) याक़ूत व मूँगे हैं

55:59 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:59
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से मुकरोगे

55:60 هَلْ جَزَآءُ ٱلْإِحْسَـٰنِ إِلَّا ٱلْإِحْسَـٰنُ
55:60
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
भला नेकी का बदला नेकी के सिवा कुछ और भी है

55:61 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:61
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

55:62 وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ
55:62
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं

55:63 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:63
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

55:64 مُدْهَآمَّتَانِ
55:64
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब

55:65 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:65
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे

55:66 فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ
55:66
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे

55:67 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:67
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे

55:68 فِيهِمَا فَـٰكِهَةٌ وَنَخْلٌ وَرُمَّانٌ
55:68
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार

55:69 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:69
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

55:70 فِيهِنَّ خَيْرَٰتٌ حِسَانٌ
55:70
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उन बाग़ों में ख़ुश ख़ुल्क और ख़ूबसूरत औरतें होंगी

55:71 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:71
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

55:72 حُورٌ مَّقْصُورَٰتٌ فِى ٱلْخِيَامِ
55:72
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
वह हूरें हैं जो ख़ेमों में छुपी बैठी हैं

55:73 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:73
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे

55:74 لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَآنٌّ
55:74
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने

55:75 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:75
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से मुकरोगे

55:76 مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍ وَعَبْقَرِىٍّ حِسَانٍ
55:76
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
ये लोग सब्ज़ कालीनों और नफीस व हसीन मसनदों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे

55:77 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55:77
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
फिर तुम अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से इन्कार करोगे

55:78 تَبَـٰرَكَ ٱسْمُ رَبِّكَ ذِى ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ
55:78
Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi) :
(ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार जो साहिबे जलाल व करामत है उसी का नाम बड़ा बाबरकत है