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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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82 Al-'Infiţār ٱلْإِنْفِطَار

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

82:1 إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ
82:1 जब आसमान तर्ख़ जाएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:2 وَإِذَا ٱلْكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتْ
82:2 और जब तारे झड़ पड़ेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:3 وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ
82:3 और जब दरिया बह (कर एक दूसरे से मिल) जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:4 وَإِذَا ٱلْقُبُورُ بُعْثِرَتْ
82:4 और जब कब्रें उखाड़ दी जाएँगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:5 عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ
82:5 तब हर शख़्श को मालूम हो जाएगा कि उसने आगे क्या भेजा था और पीछे क्या छोड़ा था - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:6 يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ
82:6 ऐ इन्सान तुम्हें अपने परवरदिगार के बारे में किस चीज़ ने धोका दिया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:7 ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ
82:7 जिसने तुझे पैदा किया तो तुझे दुरूस्त बनाया और मुनासिब आज़ा दिए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:8 فِىٓ أَىِّ صُورَةٍ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ
82:8 और जिस सूरत में उसने चाहा तेरे जोड़ बन्द मिलाए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:9 كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ
82:9 हाँ बात ये है कि तुम लोग जज़ा (के दिन) को झुठलाते हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:10 وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَـٰفِظِينَ
82:10 हालॉकि तुम पर निगेहबान मुक़र्रर हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:11 كِرَامًا كَـٰتِبِينَ
82:11 बुर्ज़ुग लोग (फरिश्ते सब बातों को) लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन) - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:12 يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ
82:12 जो कुछ तुम करते हो वह सब जानते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:13 إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ
82:13 बेशक नेको कार (बेहिश्त की) नेअमतों में होंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:14 وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍ
82:14 और बदकार लोग यक़ीनन जहन्नुम में जज़ा के दिन - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:15 يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ
82:15 उसी में झोंके जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:16 وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ
82:16 और वह लोग उससे छुप न सकेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:17 وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
82:17 और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:18 ثُمَّ مَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
82:18 फिर तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या चीज़ है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

82:19 يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِّنَفْسٍ شَيْـًٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ
82:19 उस दिन कोई शख़्श किसी शख़्श की भलाई न कर सकेगा और उस दिन हुक्म सिर्फ ख़ुदा ही का होगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)