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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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77 Al-Mursalāt ٱلْمُرْسَلَات

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

77:1 وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًا
77:1 हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:2 فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًا
77:2 फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:3 وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًا
77:3 और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:4 فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًا
77:4 फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:5 فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
77:5 फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:6 عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
77:6 ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:7 إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌ
77:7 कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:8 فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ
77:8 फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:9 وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ
77:9 और जब आसमान फट जाएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:10 وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ
77:10 और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:11 وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
77:11 और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:12 لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
77:12 (फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:13 لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ
77:13 फ़ैसले के दिन के लिए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:14 وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
77:14 और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:15 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:15 उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:16 أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ
77:16 क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:17 ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
77:17 फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:18 كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ
77:18 हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:19 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:19 उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:20 أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍ مَّهِينٍ
77:20 क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:21 فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ
77:21 फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:22 إِلَىٰ قَدَرٍ مَّعْلُومٍ
77:22 एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:23 فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
77:23 फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:24 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:24 उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:25 أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
77:25 क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:26 أَحْيَآءً وَأَمْوَٰتًا
77:26 और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:27 وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءً فُرَاتًا
77:27 और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:28 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:28 उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:29 ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
77:29 जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:30 ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍ
77:30 (धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:31 لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ
77:31 जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:32 إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍ كَٱلْقَصْرِ
77:32 उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:33 كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌ صُفْرٌ
77:33 गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:34 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:34 उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:35 هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
77:35 ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:36 وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
77:36 और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:37 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:37 उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:38 هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
77:38 यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:39 فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيدُونِ
77:39 तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:40 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:40 उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:41 إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍ وَعُيُونٍ
77:41 बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:42 وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ
77:42 और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:43 كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
77:43 (दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:44 إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ
77:44 मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:45 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:45 उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:46 كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
77:46 (झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:47 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:47 उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:48 وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ
77:48 और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:49 وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:49 उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

77:50 فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ
77:50 अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)