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Original Text
Suhel Khan and Saifur Nadwi
Abdullah Yusuf Ali
Abdul Majid Daryabadi
Abul Ala Maududi
Ahmed Ali
Ahmed Raza Khan
A. J. Arberry
Ali Quli Qarai
Hasan al-Fatih Qaribullah and Ahmad Darwish
Mohammad Habib Shakir
Mohammed Marmaduke William Pickthall
Muhammad Sarwar
Muhammad Taqi-ud-Din al-Hilali and Muhammad Muhsin Khan
Safi-ur-Rahman al-Mubarakpuri
Saheeh International
Talal Itani
Transliteration
Wahiduddin Khan
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.
77:1
وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًا
77:1
हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:2
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًا
77:2
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:3
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًا
77:3
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:4
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًا
77:4
फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:5
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
77:5
फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:6
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
77:6
ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:7
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌ
77:7
कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:8
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ
77:8
फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:9
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ
77:9
और जब आसमान फट जाएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:10
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ
77:10
और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:11
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
77:11
और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:12
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
77:12
(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:13
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ
77:13
फ़ैसले के दिन के लिए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:14
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
77:14
और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:15
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:15
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:16
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ
77:16
क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:17
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
77:17
फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:18
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ
77:18
हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:19
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:19
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:20
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍ مَّهِينٍ
77:20
क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:21
فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ
77:21
फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:22
إِلَىٰ قَدَرٍ مَّعْلُومٍ
77:22
एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:23
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
77:23
फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:24
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:24
उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:25
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
77:25
क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:26
أَحْيَآءً وَأَمْوَٰتًا
77:26
और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:27
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءً فُرَاتًا
77:27
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:28
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:28
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:29
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
77:29
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:30
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍ
77:30
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:31
لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ
77:31
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:32
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍ كَٱلْقَصْرِ
77:32
उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:33
كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌ صُفْرٌ
77:33
गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:34
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:34
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:35
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
77:35
ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:36
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
77:36
और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:37
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:37
उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:38
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
77:38
यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:39
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيدُونِ
77:39
तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:40
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:40
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:41
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍ وَعُيُونٍ
77:41
बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:42
وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ
77:42
और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:43
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
77:43
(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:44
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ
77:44
मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:45
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:45
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:46
كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
77:46
(झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:47
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:47
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:48
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ
77:48
और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:49
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
77:49
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
77:50
فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ
77:50
अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)