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Suhel Khan and Saifur Nadwi

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79 An-Nāzi`āt ٱلنَّازِعَات

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

79:1 وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًا
79:1 उन (फ़रिश्तों) की क़सम - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:2 وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًا
79:2 जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:3 وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًا
79:3 और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:4 فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًا
79:4 और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:5 فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًا
79:5 फिर एक के आगे बढ़ते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:6 يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ
79:6 फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:7 تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ
79:7 जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:8 قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ
79:8 उस दिन दिलों को धड़कन होगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:9 أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌ
79:9 उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:10 يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ
79:10 कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:11 أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًا نَّخِرَةً
79:11 क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:12 قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ
79:12 कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:13 فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ
79:13 वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:14 فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ
79:14 और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:15 هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ
79:15 (ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:16 إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى
79:16 जब उनको परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:17 ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ
79:17 कि फिरऔन के पास जाओ वह सरकश हो गया है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:18 فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ
79:18 (और उससे) कहो कि क्या तेरी ख्वाहिश है कि (कुफ्र से) पाक हो जाए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:19 وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ
79:19 और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:20 فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ
79:20 ग़रज़ मूसा ने उसे (असा का बड़ा) मौजिज़ा दिखाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:21 فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ
79:21 तो उसने झुठला दिया और न माना - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:22 ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ
79:22 फिर पीठ फेर कर (ख़िलाफ़ की) तदबीर करने लगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:23 فَحَشَرَ فَنَادَىٰ
79:23 फिर (लोगों को) जमा किया और बुलन्द आवाज़ से चिल्लाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:24 فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ
79:24 तो कहने लगा मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूँ - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:25 فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ
79:25 तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:26 إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰٓ
79:26 बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:27 ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا
79:27 भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:28 رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا
79:28 कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:29 وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا
79:29 फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:30 وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ
79:30 और उसके बाद ज़मीन को फैलाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:31 أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا
79:31 उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:32 وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا
79:32 और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:33 مَتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ
79:33 (ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:34 فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ
79:34 तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:35 يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ
79:35 जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:36 وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
79:36 और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:37 فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
79:37 तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:38 وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا
79:38 और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:39 فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
79:39 उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:40 وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ
79:40 मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:41 فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
79:41 तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:42 يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا
79:42 (ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:43 فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ
79:43 कि उसका कहीं थल बेड़ा भी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:44 إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ
79:44 तो तुम उसके ज़िक्र से किस फ़िक्र में हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:45 إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا
79:45 उस (के इल्म) की इन्तेहा तुम्हारे परवरदिगार ही तक है तो तुम बस जो उससे डरे उसको डराने वाले हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

79:46 كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا
79:46 जिस दिन वह लोग इसको देखेंगे तो (समझेंगे कि दुनिया में) बस एक शाम या सुबह ठहरे थे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)