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Original Text
Suhel Khan and Saifur Nadwi
Abdullah Yusuf Ali
Abdul Majid Daryabadi
Abul Ala Maududi
Ahmed Ali
Ahmed Raza Khan
A. J. Arberry
Ali Quli Qarai
Hasan al-Fatih Qaribullah and Ahmad Darwish
Mohammad Habib Shakir
Mohammed Marmaduke William Pickthall
Muhammad Sarwar
Muhammad Taqi-ud-Din al-Hilali and Muhammad Muhsin Khan
Safi-ur-Rahman al-Mubarakpuri
Saheeh International
Talal Itani
Transliteration
Wahiduddin Khan
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.
79:1
وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًا
79:1
उन (फ़रिश्तों) की क़सम - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:2
وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًا
79:2
जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:3
وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًا
79:3
और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:4
فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًا
79:4
और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:5
فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًا
79:5
फिर एक के आगे बढ़ते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:6
يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ
79:6
फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:7
تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ
79:7
जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:8
قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ
79:8
उस दिन दिलों को धड़कन होगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:9
أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌ
79:9
उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:10
يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ
79:10
कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:11
أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًا نَّخِرَةً
79:11
क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:12
قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ
79:12
कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:13
فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ
79:13
वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:14
فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ
79:14
और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:15
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ
79:15
(ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:16
إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى
79:16
जब उनको परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:17
ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ
79:17
कि फिरऔन के पास जाओ वह सरकश हो गया है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:18
فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ
79:18
(और उससे) कहो कि क्या तेरी ख्वाहिश है कि (कुफ्र से) पाक हो जाए - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:19
وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ
79:19
और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:20
فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ
79:20
ग़रज़ मूसा ने उसे (असा का बड़ा) मौजिज़ा दिखाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:21
فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ
79:21
तो उसने झुठला दिया और न माना - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:22
ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ
79:22
फिर पीठ फेर कर (ख़िलाफ़ की) तदबीर करने लगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:23
فَحَشَرَ فَنَادَىٰ
79:23
फिर (लोगों को) जमा किया और बुलन्द आवाज़ से चिल्लाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:24
فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ
79:24
तो कहने लगा मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूँ - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:25
فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ
79:25
तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:26
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰٓ
79:26
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:27
ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا
79:27
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:28
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا
79:28
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:29
وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا
79:29
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:30
وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ
79:30
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:31
أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا
79:31
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:32
وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا
79:32
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:33
مَتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ
79:33
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:34
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ
79:34
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:35
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ
79:35
जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:36
وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
79:36
और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:37
فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
79:37
तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:38
وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا
79:38
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:39
فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
79:39
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:40
وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ
79:40
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:41
فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
79:41
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:42
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا
79:42
(ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते हैं - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:43
فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ
79:43
कि उसका कहीं थल बेड़ा भी है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:44
إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ
79:44
तो तुम उसके ज़िक्र से किस फ़िक्र में हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:45
إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا
79:45
उस (के इल्म) की इन्तेहा तुम्हारे परवरदिगार ही तक है तो तुम बस जो उससे डरे उसको डराने वाले हो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)
79:46
كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا
79:46
जिस दिन वह लोग इसको देखेंगे तो (समझेंगे कि दुनिया में) बस एक शाम या सुबह ठहरे थे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)