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Farooq Khan and Ahmed

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78 An-Naba' ٱلنَّبَأ

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

78:1 عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ
78:1 किस चीज़ के विषय में वे आपस में पूछ-गच्छ कर रहे है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:2 عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ
78:2 उस बड़ी ख़बर के सम्बन्ध में, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:3 ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
78:3 जिसमें वे मतभेद रखते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:4 كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
78:4 कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:5 ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
78:5 फिर कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:6 أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَـٰدًا
78:6 क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:7 وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًا
78:7 और पहाड़ों को मेख़े? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:8 وَخَلَقْنَـٰكُمْ أَزْوَٰجًا
78:8 और हमने तुम्हें जोड़-जोड़े पैदा किया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:9 وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا
78:9 और तुम्हारी नींद को थकन दूर करनेवाली बनाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:10 وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًا
78:10 रात को आवरण बनाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:11 وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًا
78:11 और दिन को जीवन-वृति के लिए बनाया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:12 وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا
78:12 और तुम्हारे ऊपर सात सुदृढ़ आकाश निर्मित किए, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:13 وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا
78:13 और एक तप्त और प्रकाशमान प्रदीप बनाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:14 وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءً ثَجَّاجًا
78:14 और बरस पड़नेवाली घटाओं से हमने मूसलाधार पानी उतारा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:15 لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّا وَنَبَاتًا
78:15 ताकि हम उसके द्वारा अनाज और वनस्पति उत्पादित करें - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:16 وَجَنَّـٰتٍ أَلْفَافًا
78:16 और सघन बांग़ भी। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:17 إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَـٰتًا
78:17 निस्संदेह फ़ैसले का दिन एक नियत समय है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:18 يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
78:18 जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:19 وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًا
78:19 और आकाश खोल दिया जाएगा तो द्वार ही द्वार हो जाएँगे; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:20 وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
78:20 और पहाड़ चलाए जाएँगे, तो वे बिल्कुल मरीचिका होकर रह जाएँगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:21 إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا
78:21 वास्तव में जहन्नम एक घात-स्थल है; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:22 لِّلطَّـٰغِينَ مَـَٔابًا
78:22 सरकशों का ठिकाना है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:23 لَّـٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًا
78:23 वस्तुस्थिति यह है कि वे उसमें मुद्दत पर मुद्दत बिताते रहेंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:24 لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا
78:24 वे उसमे न किसी शीतलता का मज़ा चखेगे और न किसी पेय का, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:25 إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا
78:25 सिवाय खौलते पानी और बहती पीप-रक्त के - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:26 جَزَآءً وِفَاقًا
78:26 यह बदले के रूप में उनके कर्मों के ठीक अनुकूल होगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:27 إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًا
78:27 वास्तव में किसी हिसाब की आशा न रखते थे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:28 وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كِذَّابًا
78:28 और उन्होंने हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:29 وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَـٰهُ كِتَـٰبًا
78:29 और हमने हर चीज़ लिखकर गिन रखी है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:30 فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا
78:30 "अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे। " - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:31 إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا
78:31 निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:32 حَدَآئِقَ وَأَعْنَـٰبًا
78:32 बाग़ है और अंगूर, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:33 وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا
78:33 और नवयौवना समान उम्रवाली, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:34 وَكَأْسًا دِهَاقًا
78:34 और छलक़ता जाम - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:35 لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّٰبًا
78:35 वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:36 جَزَآءً مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًا
78:36 यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:37 رَّبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَـٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا
78:37 वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:38 يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَقَالَ صَوَابًا
78:38 जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:39 ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا
78:39 वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

78:40 إِنَّآ أَنذَرْنَـٰكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَـٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا
78:40 हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)