Selected
Original Text
Farooq Khan and Ahmed
Abdullah Yusuf Ali
Abdul Majid Daryabadi
Abul Ala Maududi
Ahmed Ali
Ahmed Raza Khan
A. J. Arberry
Ali Quli Qarai
Hasan al-Fatih Qaribullah and Ahmad Darwish
Mohammad Habib Shakir
Mohammed Marmaduke William Pickthall
Muhammad Sarwar
Muhammad Taqi-ud-Din al-Hilali and Muhammad Muhsin Khan
Safi-ur-Rahman al-Mubarakpuri
Saheeh International
Talal Itani
Transliteration
Wahiduddin Khan
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.
78:1
عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ
78:1
किस चीज़ के विषय में वे आपस में पूछ-गच्छ कर रहे है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:2
عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ
78:2
उस बड़ी ख़बर के सम्बन्ध में, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:3
ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
78:3
जिसमें वे मतभेद रखते है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:4
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
78:4
कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:5
ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
78:5
फिर कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:6
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَـٰدًا
78:6
क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:7
وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًا
78:7
और पहाड़ों को मेख़े? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:8
وَخَلَقْنَـٰكُمْ أَزْوَٰجًا
78:8
और हमने तुम्हें जोड़-जोड़े पैदा किया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:9
وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا
78:9
और तुम्हारी नींद को थकन दूर करनेवाली बनाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:10
وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًا
78:10
रात को आवरण बनाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:11
وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًا
78:11
और दिन को जीवन-वृति के लिए बनाया - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:12
وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا
78:12
और तुम्हारे ऊपर सात सुदृढ़ आकाश निर्मित किए, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:13
وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا
78:13
और एक तप्त और प्रकाशमान प्रदीप बनाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:14
وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءً ثَجَّاجًا
78:14
और बरस पड़नेवाली घटाओं से हमने मूसलाधार पानी उतारा, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:15
لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّا وَنَبَاتًا
78:15
ताकि हम उसके द्वारा अनाज और वनस्पति उत्पादित करें - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:16
وَجَنَّـٰتٍ أَلْفَافًا
78:16
और सघन बांग़ भी। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:17
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَـٰتًا
78:17
निस्संदेह फ़ैसले का दिन एक नियत समय है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:18
يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
78:18
जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे। - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:19
وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًا
78:19
और आकाश खोल दिया जाएगा तो द्वार ही द्वार हो जाएँगे; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:20
وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
78:20
और पहाड़ चलाए जाएँगे, तो वे बिल्कुल मरीचिका होकर रह जाएँगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:21
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا
78:21
वास्तव में जहन्नम एक घात-स्थल है; - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:22
لِّلطَّـٰغِينَ مَـَٔابًا
78:22
सरकशों का ठिकाना है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:23
لَّـٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًا
78:23
वस्तुस्थिति यह है कि वे उसमें मुद्दत पर मुद्दत बिताते रहेंगे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:24
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا
78:24
वे उसमे न किसी शीतलता का मज़ा चखेगे और न किसी पेय का, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:25
إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا
78:25
सिवाय खौलते पानी और बहती पीप-रक्त के - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:26
جَزَآءً وِفَاقًا
78:26
यह बदले के रूप में उनके कर्मों के ठीक अनुकूल होगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:27
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًا
78:27
वास्तव में किसी हिसाब की आशा न रखते थे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:28
وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كِذَّابًا
78:28
और उन्होंने हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:29
وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَـٰهُ كِتَـٰبًا
78:29
और हमने हर चीज़ लिखकर गिन रखी है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:30
فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا
78:30
"अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे। " - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:31
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا
78:31
निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:32
حَدَآئِقَ وَأَعْنَـٰبًا
78:32
बाग़ है और अंगूर, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:33
وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا
78:33
और नवयौवना समान उम्रवाली, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:34
وَكَأْسًا دِهَاقًا
78:34
और छलक़ता जाम - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:35
لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّٰبًا
78:35
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:36
جَزَآءً مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًا
78:36
यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:37
رَّبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَـٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا
78:37
वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:38
يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَقَالَ صَوَابًا
78:38
जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:39
ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا
78:39
वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
78:40
إِنَّآ أَنذَرْنَـٰكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَـٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا
78:40
हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!" - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)