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Farooq Khan and Ahmed

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96 Al-`Alaq ٱلْعَلَق

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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

96:1 ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ
96:1 पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:2 خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ
96:2 पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:3 ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ
96:3 पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:4 ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ
96:4 जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:5 عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
96:5 मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:6 كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ
96:6 कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:7 أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ
96:7 इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:8 إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ
96:8 निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:9 أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ
96:9 क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:10 عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ
96:10 जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है? - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:11 أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ
96:11 तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:12 أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ
96:12 या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है) - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:13 أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ
96:13 तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है) - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:14 أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ
96:14 क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:15 كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ
96:15 कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:16 نَاصِيَةٍ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍ
96:16 झूठी, ख़ताकार चोटी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:17 فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ
96:17 अब बुला ले वह अपनी मजलिस को! - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:18 سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ
96:18 हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)

96:19 كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩
96:19 कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)