Selected
Original Text
Farooq Khan and Ahmed
Abdullah Yusuf Ali
Abdul Majid Daryabadi
Abul Ala Maududi
Ahmed Ali
Ahmed Raza Khan
A. J. Arberry
Ali Quli Qarai
Hasan al-Fatih Qaribullah and Ahmad Darwish
Mohammad Habib Shakir
Mohammed Marmaduke William Pickthall
Muhammad Sarwar
Muhammad Taqi-ud-Din al-Hilali and Muhammad Muhsin Khan
Safi-ur-Rahman al-Mubarakpuri
Saheeh International
Talal Itani
Transliteration
Wahiduddin Khan
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.
96:1
ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ
96:1
पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:2
خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ
96:2
पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:3
ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ
96:3
पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:4
ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ
96:4
जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:5
عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
96:5
मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:6
كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ
96:6
कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:7
أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ
96:7
इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:8
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ
96:8
निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:9
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ
96:9
क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:10
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ
96:10
जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है? - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:11
أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ
96:11
तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:12
أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ
96:12
या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है) - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:13
أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ
96:13
तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है) - - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:14
أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ
96:14
क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है? - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:15
كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ
96:15
कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे, - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:16
نَاصِيَةٍ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍ
96:16
झूठी, ख़ताकार चोटी - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:17
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ
96:17
अब बुला ले वह अपनी मजलिस को! - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:18
سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ
96:18
हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)
96:19
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩
96:19
कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो - Farooq Khan and Ahmed (Hindi)