Selected

Original Text
Suhel Khan and Saifur Nadwi

Available Translations

96 Al-`Alaq ٱلْعَلَق

< Previous   19 Āyah   The Clot      Next >  

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

96:1 ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ
96:1 (ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:2 خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ
96:2 उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:3 ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ
96:3 और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:4 ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ
96:4 जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:5 عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
96:5 उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:6 كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ
96:6 सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:7 أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ
96:7 तो सरकश हो जाता है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:8 إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ
96:8 बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:9 أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ
96:9 भला तुमने उस शख़्श को भी देखा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:10 عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ
96:10 जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:11 أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ
96:11 भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:12 أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ
96:12 (तो रोकना कैसा) - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:13 أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ
96:13 भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:14 أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ
96:14 (तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:15 كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ
96:15 देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:16 نَاصِيَةٍ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍ
96:16 झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:17 فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ
96:17 तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:18 سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ
96:18 (ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)

96:19 كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩
96:19 और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा) - Suhel Khan and Saifur Nadwi (Hindi)